Uttarakhand

चारधाम यात्रा में एक सप्ताह में 54% तक घटी श्रद्धालुओं की संख्या, केदारनाथ में सबसे बड़ी गिरावट

देहरादून: उत्तराखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूरी तरह सक्रिय होते ही विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा पर मौसम की मार साफ दिखाई देने लगी है। पहाड़ों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की आशंका और दुर्गम रास्तों के चलते देश-दुनिया से आने वाले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने फिलहाल अपनी यात्रा टाल दी है। इसका सीधा असर केदारनाथ, बदरीनाथ समेत चारों धामों और हेमकुंड साहिब पहुंचने वाले यात्रियों के आंकड़ों पर पड़ा है, जिनमें भारी कमी दर्ज की गई है।

एक हफ्ते में आधा रह गया यात्रियों का आंकड़ा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, महज एक सप्ताह के भीतर यानी 1 जुलाई से 7 जुलाई के बीच चारधाम और हेमकुंड साहिब पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या में 53.7 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है:

  • 01 जुलाई: 27,232 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।
  • 07 जुलाई: यह संख्या घटकर महज 12,594 रह गई।

केदारनाथ धाम में सबसे बड़ी गिरावट (74.8%)

मानसून का सबसे तगड़ा असर बाबा केदार की यात्रा पर पड़ा है। पहाड़ी और कठिन पैदल रास्तों के कारण खराब मौसम में सबसे पहले केदारनाथ की यात्रा ही प्रभावित होती है।

  • यात्रियों की संख्या: 1 जुलाई को जहां 6,553 श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचे थे, वहीं 7 जुलाई को यह आंकड़ा सिमटकर सिर्फ 1,649 रह गया (यानी करीब 75% की भारी गिरावट)।

बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का हाल

केदारनाथ के अलावा बाकी तीनों धामों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है:

धाम1 जुलाई को श्रद्धालु7 जुलाई को श्रद्धालुगिरावट (%)
बदरीनाथ13,1925,35759.4%
यमुनोत्री2,0431,10545.9%
गंगोत्री2,1161,17444.5%

गिरावट के बावजूद चारधाम यात्रा 2026 ने रचा नया इतिहास!

भले ही मानसून के कारण वर्तमान आंकड़ों में अस्थायी कमी आई हो, लेकिन इस साल की चारधाम यात्रा ने शुरुआत से ही सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।

18 अप्रैल से 7 जुलाई तक केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब को मिलाकर कुल 43.57 लाख श्रद्धालु बाबा के दर पर शीश नवा चुके हैं, जो उत्तराखंड के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक आंकड़ा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस शानदार रिकॉर्ड पर खुशी जताते हुए इसका श्रेय राज्य सरकार द्वारा सड़कों के सुदृढ़ीकरण, मजबूत सुरक्षा चक्र, कुशल यात्रा प्रबंधन और श्रद्धालुओं को दी जा रही आधुनिक सुविधाओं को दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि विपरीत मौसम में भी सरकार हर एक श्रद्धालु की सुरक्षित और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे मुस्तैद है।

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